कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा? जानकर नहीं रोक पाए लोग अपने आंसू…

मैं तेरा हाय रे जबरा, होय रे जबरा फैन हो गया,

ओ तुझे देखते ही दिल में टन टनेन हो गया

यकीन मानिये अगर आपने बाहुबली का पहला पार्ट देखा है तो थिएटर से निकलने के बाद आपके मन में भी कुछ इसी तरह के ख़्याल आने वाले हैं। वैसे आपने अगर पहला पार्ट देखा है तो आपसे तो यूँ भी इस फिल्म को देखने के लिए सब्र नहीं हो रहा होगा। लेकिन ‘बाहुबली-2’ के टिकट खरीदने में कितनी मशक्कत है, मैं अच्छी तरह से समझ सकता हूँ। इसलिए फिल्म के टिकट आपको जब मिल पाएंगे सो मिल पाएंगे लेकिन उससे पहले मैं आपको थोड़ी सी जानकारी दे देता हूँ जिसे पढ़कर आपकी एक्ससाइटमेंट डबल हो सकती है।

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मैं जिस थिएटर में फिल्म देखने गया था वहां सुबह 9 बजे वाले शो में जमा भीड़ को देखकर, ऐसा लग रहा था जैसे फिल्म के टिकट फ्री में बंट रहे हों। मुझे फर्स्ट डे फर्स्ट शो देखने में गर्व महसूस हो रहा था क्योंकि मैं भी उन किस्मत वाले लोगों में से था जिन्हें फर्स्ट शो के टिकट नसीब हो पाए थे।

फिल्म की शुरुआत कटप्पा की आवाज़ और उसी सीन से शुरू होती है, जहाँ पर पहला पार्ट ख़त्म हुआ था। कटप्पा अमरेंद्र बाहुबली के बेटे, महेंद्र बाहुबली को उनके पिता की कहानी बताना शुरू करते हैं। जिसके दौरान स्टोरी फ्लैशबैक में चली जाती है। जब महारानी शिवगामी (राम्या कृष्णन) बाहुबली (प्रभास) के राज्याभिषेक की घोषणा करती हैं। राज्याभिषेक से पहले बाहुबली (प्रभास), कटप्पा (सत्यराज) के साथ देश भ्रमण पर निकल जाते हैं। उसी दौरान उनकी मुलाकात राजकुमारी देवसेना (अनुष्का शेट्टी) से होती है और दोनों एक दूसरे को दिल दे बैठते हैं। जब इस बात की भनक भल्लालदेव (राणा दग्गुबाती) को लगती है तो वो कुछ ऐसा षड़यंत्र रचता है कि देवसेना और अमरेंद्र बाहुबली के लिए बहुत मुश्किलें पैदा हो जाती हैं। यहाँ तक कि उन्हें अपना राजपाट भी छोड़ देना पड़ता है। फिर आपको उस सवाल का जवाब मिलता है जिसका आप दो सालों से इंतज़ार कर रहे थे कि ‘कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा?’ जब यह सीन थिएटर में आता है तो इसे देखने के बाद पत्थर दिल आदमी का भी दिल पसीज सकता है। इस सवाल के जवाब के अलावा भी फिल्म में बहुत सी ऐसी बातें हैं जो इसे बार-बार देखने पर मजबूर कर देंगी।

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‘कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा?’ जब आपको फिल्म में इस सवाल का जवाब मिलेगा आपकी आँखों में आंसू आ जाएंगे। इस सीन के आते-आते बाहुबली से इतना लगाव हो जाता है कि मन मानना ही नहीं चाहता कि अब वो स्क्रीन पर दिखाई नहीं देंगे।

फिल्म की कहानी पहले फ्रेम से आखिरी फ्रेम तक आपको बांधे रखती है। चाहे वो एक्शन, रोमांस, कॉमेडी या सस्पेंस हो, इसमें हर वो मसाला मौजूद है जिसकी उम्मीद लेकर दर्शक सिनेमाघर में जाते हैं। इसलिए प्रभास के अलावा कहानी भी इस फिल्म की हीरो है।

आज के दौर में थोक के भाव में फ़िल्में बन रही हैं, ऐसे में इक्का-दुक्का फ़िल्में ही ऐसी होती हैं जिन्हें देखकर किसी के रोंगटे खड़े हो जाएं। लेकिन ‘बाहुबली-2’ एक ऐसी फिल्म है जिसमें एक दो बार नहीं कई बार आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे।

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ये फिल्म नहीं एक एक्सपीरियंस है, जिसे आप बार-बार फील करना चाहेंगे ?

मेरे हिसाब से ‘बाहुबली-2’ एक फिल्म नहीं एक एक्सपीरियंस है। जब आप फिल्म देखकर थिएटर से बाहर निकलेंगे तो आपको फील होगा कि जैसे कि आप ‘माहिष्मती साम्राज्य’ में रहकर आए हों। फिल्म के ख़त्म होते-होते सारे किरदार आपको अपने से लगने लगते हैं।

फिल्म के खत्म होने के बाद मैंने कई लोगों को ये बोलते हुए सुना था कि “एक बार और आना पड़ेगा” इसलिए अगर आपने भी फिल्म नहीं देखी तो जल्द ही टिकट बुक कीजिये क्योंकि ये फिल्म आप एक बार नहीं बार-बार देखने वाले हैं।

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