क्या आप जानते है कि रावण के वध के बाद मंदोदरी का क्या हुआ था

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रामायण के मुख्य पात्र मंदोदरी के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं कि रावण के मरने के बाद उनका क्या हुआ क्या हुआ रावण के साथ सती हो गई थी या कुछ और हुआ था आज हम आपको इसी के बारे में बताएंगे।

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रामायण में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की रामलीला सदियों से सुनने और टीवी शो में देखने को मिलती है, जैसा की आप जानते है की भगवान राम और रावण के बीच महासंग्राम बहुत ही भयानक और इतिहास पूर्ण रहा आप ये भी जानते है की माँ सीता का हरण लंका पारी रावण के लिए मौत का कारण बना और साथ ही जब राम रावण युद्ध हुआ तब अंत में रावण की पराजय और और मृत्यु हुई !

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मेघनाथ की पत्नी मेघनाथ के साथ सती हो गई थी लेकिन आखिर क्या कारण है जिससे रावण की पत्नी मंदोदरी ने रावण के साथ सती नहीं हो सकी। जैसा कि रामायण में उल्लेख है कि राम ने रावण को मार कर लंका का राजा विभीषण को बना दिया था और वह अपनी पत्नी सीता को लेकर अयोध्या चले गए अयोध्या में उन्होंने 11000 वर्ष तक राज किया।!

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रावण के मृत्यु के बाद मंदोदरी ने रावण के साथ सती होने से उचित विभीषण से शादी करने को समझा और उन्होंने विभीषण के साथ शादी कर ली।

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उस समय भगवान श्रीराम ने लक्ष्मण से कहा कि इस संसार से नीति, राजनीति और शक्ति का महान् पंडित विदा ले रहा है, तुम उसके पास जाओ और उससे जीवन की कुछ ऐसी शिक्षा ले लो जो और कोई नहीं दे सकता। श्रीराम की बात मानकर लक्ष्मण मरणासन्न अवस्था में पड़े रावण के सिर के नजदीक जाकर खड़े हो गए। रावण ने कुछ नहीं कहा।

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लक्ष्मणजी वापस रामजी के पास लौटकर आए। तब भगवान ने कहा कि यदि किसी से ज्ञान प्राप्त करना हो तो उसके चरणों के पास खड़े होना चाहिए न कि सिर की ओर। यह बात सुनकर लक्ष्मण जाकर इस रावण के पैरों की ओर खड़े हो गए। उस समय महापंडित रावण ने लक्ष्मण को तीन बातें बताई जो जीवन में सफलता की कुंजी है।

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पहली बात जो रावण ने लक्ष्मण को बताई वो ये थी कि शुभ कार्य जितनी जल्दी हो कर डालना और अशुभ को जितना टाल सकते हो टाल देना चाहिए यानी शुभस्य शीघ्रम्। मैंने श्रीराम को पहचान नहीं सका और उनकी शरण में आने में देरी कर दी, इसी कारण मेरी ये हालत हुई !

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दूसरी बात ये कि अपने प्रतिद्वंद्वी, अपने शत्रु को कभी अपने से छोटा नहीं समझना चाहिए, मैं ये भूल कर गया। मैंने जिन्हें साधारण वानर और भालू समझा उन्होंने मेरी पूरी सेना को नष्ट कर दिया। मैंने जब ब्रह्माजी से अमरता का वरदान मांगा था तब मनुष्य और वानर के अतिरिक्त कोई मेरा वध न कर सके ऐसा कहा था क्योंकि मैं मनुष्य और वानर को तुच्छ समझता था यह मेरी बहुत बड़ी गलत सोच थी ! रावण ने लक्ष्मण को तीसरी और अंतिम बात ये बताई कि अपने जीवन का कोई राज हो तो उसे किसी को भी नहीं बताना चाहिए। यहां भी मैं चूक गया क्योंकि विभीषण मेरी मृत्यु का राज जानता था। ये मेरे जीवन की सबसे बड़ी गलती थी।

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