फिल्म गोलमाल करने के बाद इस एक्टर को पैसे के लिए करना पड़ा ढाबे में काम. फिर ऐसे बदली ज़िन्दगी

संजय मिश्रा उन कुछ अभिनेताओं में से एक हैं जिन्होंने भारतीय फिल्म उद्योग में अपनी छाप छोड़ी, वह किसी भी भूमिका को उठाकर उसको पूरी परफेक्शन के साथ पूरी करने की योग्यता रखते है. वह लगभग 25 वर्षों से हमारे हिंदी सिनेमा का हिस्सा है.

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अगर हिंदी सिनेमा एक परिवार है तो वह उसके एक ऐसे सदस्य है जो की उसे मजबूत और सशक्त बनाते है और फिर भी यह शर्म की बात है कि हम में से बहुत से लोग उनका भी नहीं जानते. संजय ने अपने एक्टिंग करियर में लगभग 100 फिल्मे करि है.

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आज उनके पास BMW जैसी महंगी गाड़ियां है और रहने के लिए एक आलिशान घर. पर यह सब उन्होंने एक दिन में नहीं कमा लिया. उन्होंने इस मुकाम तक पहुंचने के लिए काफी स्ट्रगल किया है. बिहार के दरभंगा में जन्मे संजय के पिता पेशे से जर्नलिस्ट थे और उनके दादा डिस्ट्रीक्ट मजिस्ट्रेट थे। जब वह नौ साल के थे तो उनकी फैमिली वाराणसी शिफ्ट हो गई थी। संजय ने अपनी एजुकेशन वाराणसी से की.

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ग्रेजुएशन पूरी करने के बाद संजय ने 1991 में राष्ट्रीय ड्रामा स्कूल में एडमिशन लिया. एक्टिंग के प्रति उनकी रूचि संगीत प्रोग्राम्स को देखकर हुई थी. संगीत प्रोग्रामस देखने के बाद उन्हें यह एहसास हुआ कि उनको अब इसी क्षेत्र में कुछ करना है.एक्टिंग सीखने के लिए हे उन्होंने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में एडमिशन लिया.

साल 1991 में अपना एक्टिंग का सपना पूरा करने संजय मुंबई परिवार की रजामंदी से आ गए। यहां उन्होंने 9 साल स्ट्रगल किया और इसके बाद उन्हें पहला ब्रेक मिला। उन्होंने अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत ‘चाणक्य’ सीरियल से की.

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उन्होंने 1995 में हिंदी फिल्म ‘ओह डार्लिंग ये है इंडिया’ में काम किया। इस फिल्म में उन्होंने एक हार्मोनियम प्लेयर की छोटी सी भूमिका अदा की थी. उसके बाद उन्होंने कई फिल्मे की पर उनको वो पॉपुलैरिटी नहीं मिली जिसके वह लायक थे. संजय के जब पिता की डेथ हुई, तो वो सब कुछ छोड़ कर ऋषिकेश चले गए थे।

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ऋषिकेश में संजय एक ढाबे पर काम करने लगे। संजय काफी फिल्मो में काम कर चुके थे लेकिन इतनी फिल्मों के बाद भी उन्हें वो सफलता नहीं मिली जिसके वो हकदार थे। शायद इसी वजह से उन्होंने हताश होकर ढाबे में काम करना शुरू कर दिया.

उन्होंने रोहित शेट्टी की फिल्म ‘गोलमाल’ करने के बाद एक्टिंग छोड़ दी थी . कुछ दिन बाद रोहित शेट्टी उन्हें ढूंढते ढूंढते उनके पास पहुंच गए और उन्हें फिल्म ‘ऑल द बेस्ट’ के लिए अप्रोच किया. रोहित के कई बार मानाने पर वह मान गए और लौट के आ गए. ये उनके करियर का टर्निंग प्वाइंट रहा।

 

 

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