EXCLUSIVE – आ गया कोर्ट का फैसला, बाबा राम रहीम को मिली यह सजा

सीबीआई कोर्ट पंचकुला ने 25 तारीख को बाबा राम रहीम को दोषी करार दे दिया और इसके बाद सजा सुनाने की तारीख 28 सितम्बर रखी गयी लेकिन इन दो दिनो के बीच बाबा राम रहीम के समर्थको ने देश के 4 राज्यों समेत राजधानी दिल्ली में भी खूब उत्पात मचाया, लेकिन सरकार ने बड़ी ही तेजी से इससे निपटकर सारा मामला काबू में कर लिया जिसके बाद पेशी के दौरान सीबीआई और बाबा राम रहीम दोनों को कोर्ट रूम में 2:30 पर बुलाया गया और दोनों ही पक्षों को अपनी अपनी दलीले रखने को कहा गया।

जिसमे पहले सीबीआई ने अपना पक्ष रखा और बाबा राम रहीम को ज्यादा से ज्यादा सजा देने की मांग की और इसके बाद बाबा राम रहीम के वकील ने अपना पक्ष रखा। जिसमे उन्होंने समाजसेवी होने के नाते बाबा राम रहीम को विशेष छूट देने की बात कही और कोर्ट ने दोनों ही पक्ष की दलीलों को बेहद गंभीरता के साथ लिया।


Source: Jansatta
आपको बता दे कि बाबा राम रहीम पर सन 2002 में साध्वी से बलात्कार का आरोप लगा है जिस पर एक दशक से भी ज्यादा वक्त से बहस जारी है और अब जाकर के इस पर बहस खत्म हुई हालांकि इस बीच भी राम रहीम के वकीलों ने समाजसेवी होने की, धार्मिक धर्मगुरु होने की और उम्र ज्यादा होने की दलीले दी लेकिन ये दलील क़ानून के फैसलों में बिलकुल भी मायने नही रखता और जब ये बात राम रहीम के समझ आयी तो उन्होंने कोर्ट में रोना धोना शुरू कर दिया।


इसी के साथ बाबा राम रहीम को कोर्ट ने 10 साल की सजा सुना दी, जिसकी जानकारी वकीलों ने कोर्ट के बाहर आकर के दी। राम रहीम को मिली ये सजा धर्म के नाम पर हो रहे गोरखधंधो के लिए एक चेतावनी है जो अपने सामाजिक कार्यो के नाम पर मासूम लोगो का शोषण करते है।

जेल के बाहर और पूरे रोहतक में सुरक्षा के चौक चौबंद इंतजाम किए गए हैं। चप्पे-चप्पे पर पुलिस और पारा मिलिट्री के जवानों को तैनात किया गया है। शुक्रवार (25 अगस्त) को पंचकूला में इसी कोर्ट ने एक साध्वी से बलात्कार करने के आरोप में राम रहीम को दोषी करार दिया था। पीड़ित साध्वी ने साल 2002 में चिट्ठी लिखकर अपने साथ हुई वारदात की जानकारी तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस को दी थी। उसके पत्र पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए थे। बाद में इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी।
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बाबा को दोषी करार देने के बाद उसके समर्थकों ने पंचकूला समेत पूरे हरियाणा और पंजाब में हिंसा और आगजनी की थी, जिसमें पंचकूला में 30 लोगों की मौत हो गई थी। हालात को काबू में करने के लिए सेना को फायरिंग भी करनी पड़ी थी।

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