आपको जरूर जानना चाहिए श्री राम के जाने के बाद उनके वानर सेना के वानरों का क्या हुआ

आप सभी को रामायण तो पता ही होगी. रामायण की कहानी भारतीय पौराणिक कथाएं में सबसे उच्च स्थान पर हैं. श्री राम को हिन्दू धर्म में पूजा जाता है. विष्णु भगवान् के ही अंश वे धरती पर इंसान के रूप में जनम लेते हैं.

रामायण की कहानी त्रेतायुग की है. इसमें रावण राम की पत्नी सीता का हरण करलेता है जिसके बाद राम उन्हें लंका बचाने जाते हैं.

वानर सेना ने समुद्र में सेतु बनाकर भगवान राम की मदद की। राम ने रावण को मारा और वापस अयोध्या आ गए। फिर एक दिन भगवान राम सरयु नदी में समा गए। वे पृथ्वी लोक से वापस चले गए।

रामायण की कथा आज बचे बचे को पता होगी लेकिन क्या आपको ये पता है की श्री राम के पृथ्वी लोक छोड़कर जाने के बाद उनके वानर हनुमान, सुग्रीव, बाली, अंगद, नल और नील आदि का क्या हुआ? अगर नहीं तो आगे पढ़िए.

जब प्रभु राम पृथ्वी लोक छोड़ कर जा रहे थे तो उनसे मिलने सभी वानर पहुंचे| मगर इसके बाद क्या हुआ ये बात आपको शायद ही पता हो|

सीता को बचने के लिए जब श्री राम को लंका जाना था तब हनुमान और सुग्रीव ने पूरी वानर सेना के साथ मिलकर समुद्र में पत्थरों से सेतु बनवाया था।

इस सफर में इन वानरों की भूमिका बहुत ही एहम रही है. तो जब राम पृथ्वी से चले गए तो इनका क्या हुआ?

आपको बता दें की जब सुग्रीव ने सुना कि भगवार राम पृथ्वी छोड़कर जा रहे हैं तो उन्होने बाली के पुत्र अंगद को वानर राज्य किष्किन्धा का राजपाट दे दिया।

सुग्रीव भी पृथ्वी लोग छोड़कर जाने के लिए दूसरे वानरों के साथ श्री राम से मिलने चले गए|

बाकी ऋषि और गंधर्व भी वानरों के साथ सरयू नदी पहुंच गए जहां से भगवान राम जल समाधि लेकर पृथ्वी छोड़ने वाले थे।

सभी ने मिलकर प्रभु राम से उन्हें भी अपने साथ ले जाने की विनती की. उन्होंने कहा की हे प्रभु अगर आप स्वर्गलोक चले गए तो यह हमारे लिए भी मृत्यु समान है। इससे अच्छा है कि हमें भी ले चलिए।

भगवन राम सभी से बहुत प्रसन्न हुए और उन्हें वरदान भी दिए. उन्होंने हनुमान से यहीं रहने की बात कहीं. हनुमान ने ये बात मानी और सभी को इस संसार में रहने के लिए कहा. कहा जाता है की हनुमान, जामवन्त और नल, नील सहित कुछ वानर आज भी जिंदा हैं।

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