इस कारण रखते है विश्व के मशहूर अंपायर बिली बॉडेन अपनी ऊँगली को टेड़ा

कहा जाता है की क्रिकेट सिर्फ 2 लोगो का खेल होता है एक जो इसे खेलते है और एक जो देखते है. पर ये कहावत बिलकुल गलत हो जाती है अगर अंपायर और कोई नहीं बल्कि बिली बॉडेन हो. 22 साल पहले 32 साल के बिल्ली ने अंपायर की तौर पे डेब्यू किया.

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उस समय किन दो टीम के बीच में मैच था उस पर से सबका ध्यान हट गया. क्यूंकि सारा ध्यान तो लोगो का अंपायर बिल्ली के लग अंदाज़ पे चला गया था. हर क्रिकेट प्रेमी को बिली याद होंगे. उनका छक्के का इशारा करने के लिए हाथ को धीरे-धीरे हवा में उठाना और वहीं चौके के लिए हाथ के साथ पैरों को भी लहराना.

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इस अलग अंदाज़ से वह सभी क्रिकेट प्रेमियों के चहेते बन गए. जहा कुछ लोग बिली के फैन बन गए थे वही दूसरी जगह कुछ थे जो की उनकी टेडी ऊँगली का मज़ाक उड़ा रहे थे.

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बिली का जन्म 11 अप्रैल 1963 को न्यूजीलैंड में हुआ था. वह एक तेज गेंदबाज थे. 20 साल की उम्र तक उन्होंने अपनी बेहतरीन बॉलिंग से सभी बल्लेबाज़ों को बहुत परेशान कर दिया था. पर कुछ समय बाद पता चला की वह गठिया रोग से ग्रस्त है. गठिया रोग के कारण उन्हें क्रिकेट को अलविदा कहना पड़ा.

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एक बार बिल्ली ने कहा  “अंपायरों के अपने स्वयं के अक्षर हैं और उनके स्वयं के व्यक्तित्व हैं हम क्लोन नहीं हैं हम कागज कटआउट नहीं कर रहे हैं यह एक बोरिंग जगह होगी यदि हम सब ठीक एक जैसे हो. जब आप मुझे देखते हैं उस समय मुझे कोई प्रेज़रवेटिव नहीं है। यह ताजा निचोड़ा हुआ है आप जो देख रहे हैं वही आपको मिलेगा।”

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गेंदबाज के रूप में तो उनका करियर ख़तम हो गया पर लेकिन खेल के लिए उनके प्यार में कोई कामी नहीं आयी. क्रिकेट अभी भी उनके दिल में थी  इसलिए वह अंपायरिंग में आ गए. उनकी चिकित्सा स्थिति के कारण वह अपनी अंगुलियों को सीधा करने में बहुत दर्द महसूस करते थे. इसलिए उन्होंने उसे सीधे करने के बजाय मोड़े रखने ही सही समझा.

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